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Tuesday, November 5, 2019

इगास-बग्वाल - उत्तराखंड की परंपरा.

हम पहाड़ियों में, यह माना जाता है कि भगवान राम के 14 साल के वनवास से लौटने की खबरें 11 दिन की  देरी से पहुंची क्योंकि थी।  क्योंकि  पहाड़ आसानी से नहीं आया जा सकता था। इसलिए लोगों ने दीपावली एकादशी के दिन मनाई, इसे इगास या बूढ़ी  दिवाली के रूप में जाना जाता है।

प्रदेश मैं इगास के दिन भैलो खेलने का भी रिवाज़ है। त्तराखंड की सभ्यता-संस्कृति यहां के रीति-रिवाज और त्योहारों को मनाने का तरीका बेहद ही अनूठा रहा है। 

भैलो का मतलब एक रस्सी से है, जो पेड़ों की छाल से बनी होती है। बग्वाल के दिन लोग रस्सी के दोनों कोनों में आग लगा देते हैं और फिर रस्सी को घुमाते हुए भैलो खेलते हैं।


इगास-बग्वाल एक ऐसा त्योहार है जो उत्तराखंड की परंपराओं को जीवंत रखता है।

                                               आप सब लोगों को शुभ इगास 😍😍 

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